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सावधान ! लव सेक्स और फिर गर्भ निरोधक दवाइयों का खेल – शालिनी सिंह

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RJ Shalini

मॉर्डन होती ज़िन्दगी में एक तरफ़ हेल्थ कॉन्शस होते हम और दूसरी तरफ खुद को जागरूक मानते हुए अपनी समझ से तो सही किंतु वास्तविक दृष्टिकोण में एकदम ग़लत और बचकाने फैसले से स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हम कर रहे हैं और इसके ज़िम्मेदार कोई एक लोग नहीं पूरी एक व्यवस्था ही है।

आज हर कोई पेज थ्री का एक करेक्टर बनना चाहता है ,दिखना चाहता है किंतु भूल जाता है कि 3 घण्टे के शो में दिखा हर पहलू कट, कैमरा ,एक्शन,और फिर एडिटिंग से संवर कर निकला हुआ वो कैप्सूल होता है जो सिर्फ मनोरंजन का साधन होता है और कभी कभी तमाम सवाल, और जवाब छोड़ जाता है मानसपटल पर जिसके उत्तर की ख़ातिर उस तीन घण्टे के कैप्सूल को हम जीवंत करने लगते हैं ज़िन्दगी में।

जी हां दोस्तों हर युवा ने फिल्मों से ही तो जाना सीखा कि प्यार कैसे होता है , और फिल्मों से ही जाना लव, सेक्स और धोखा क्या है ? लेकिन फिल्मों से ये नहीं जान सका कि सुरक्षित सम्बन्ध के लिए रंग में भंग भी न पड़े और रिस्क भी न हो तो प्यार में कब और कौन सा कैप्सूल प्रेमिका को खिलाना है …… अफसोस भी है और आश्चर्य भी कि प्यार में बहकते भटकते क़दम जब लड़खड़ा जाते हैं तब उस गलती को सुधारने का खूबसूरत उपहार होती है अनवांटेड 72 …. जी हां अनवांटेड 72 की एक गोली असुरक्षित यौन सम्बन्धों के होने वाले परिणाम से बचाने में साथ निभाती है 72 घण्टों के भीतर उपयोग में ली जाए तो ।

unwanted 72

सोच के देखिए कि अगर ये गोली इतनी ताकतवर है कि वांटेड को अनवांटेड कर सकती है तो कितनी घातक होगी। लेकिन प्यार में अंधे युवाओं ने जब tv पर इसका एड देखा होगा तो यकीनन उनके प्यार के पंखों को आसमान मिल गया होगा।

लेकिन अफ़सोस कि न तो किसी एड में ये पता चला न ही किसी स्वास्थ्य केंद्र के सुरक्षित सम्बन्ध के उपायों पर जागरूकता अभियान में कि अनवांटेड 72 की गोली जीवन भर की खुशियों को अनवांटेड करने में प्रभावशाली है। एड कम्पनी या फिर मेडिसिन लांच करने वाली कम्पनी या किसी भी स्वास्थ्य केंद्र की गलती हो तब दोष भी दिया जाए ।

असल में प्यार में डूबे ,भटकते, बहकते युवाओं की गलती है कि वो प्रेमांधता में ख़ुद की सुरक्षित करने के लिए जिस अनवांटेड 72 का अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं वो प्रेमिका हो या पत्नी किसी के लिए भी घातक है। ये गोली असुरक्षित यौन सम्बन्ध के लिए है ही नहीं उसके लिए तो ,सहेली ,माला डी, जैसी गोलियां है जो नियमित खानी पड़ती हैं या फिर , कंडोम ,कॉपर टी का उपयोग आम चलन में है जो हर अस्पताल में सरकारी सुविधाओं , अभियानों में लोगों के बीच जागरूकता के उद्देश्य से और सुरक्षित सम्बन्ध के साथ परिवार नियोजन हेतु अपनाने के लिए प्रसारित किए गए।

अनवांटेड 72 का कभी अस्पतालों में प्रचार नहीं किया गया क्योंकि ये गोली आपातकालीन गोली है उन अवस्थाओं के लिए जिसमें अधीरता में या जबरदस्ती या गलती से स्थापित सम्बन्ध के बाद गर्भ ठहरने के डर को समाप्त करने और स्त्री के जीवन की बड़ी मुश्किलों को सहज करने में उपयोग की जाती है ।

इसका अधिक उपयोग स्त्री को बांझ बनाने में सहयोगी है इस बात की जानकारी से कोसों दूर धड़ल्ले से प्रयोग करती लड़कियों ने इसे जादुई गोली समझकर अपना लिया और कैमिस्ट की दुकान में खुले आम उपलब्धता ने भी इस भ्रम को पुरजोर समर्थन दिया कि इसका उपयोग प्यार की राह की मुश्किलों को आसान करने के लिए ही है। आज गर्भधारण के लिए डॉक्टरों के क्लीनिक पर लाखों खर्च करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है वो भी उन लोगों की जो पढ़े लिखे ,स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और संभ्रांत हैं। एक बड़ी वजह आपके सामने लाने का प्रयास कर रही हूँ ।

इस बाबत जब मेरी डॉक्टर मित्रों से चर्चा होती है तो पता चलता है कि इन दवाओं की वजह होने वाले दुष्परिणाम को भोगती महिलाएं अक्सर आती हैं …..

जिनकी शिकायत होती है कि गोली खाई थी उसके बाद पीरियड तो आ गए लेकिन रक्तस्राव बन्द ही नहीं हो रहा ,या फिर अनियमित हो गया , वजन बढ़ने लगा आदि। हार्मोन्स पर असर डालती इन गोलियों के दुष्प्रभावों पर भी नज़र डालने की ज़रूरत है और केमिस्ट की दुकानों पर सहज उपलब्धता पर भी रोक लगाए जाने की ज़रूरत है ।

बाज़ार तो सोची समझी रणनीति के तहत फल फूल रहा है किंतु प्यार की असहजता को सहजता के रूप में परोसकर यही बाज़ार प्यार को कुछ दिन ,महीनों ,सालों का सुकून भले दे दे लेकिन उसके बाद जीवन की खुशियों पर ग्रहण बनकर छायेगा और फिर एक बार यही बाज़ार खुशियां देने के प्रलोभन लेकर कुछ और गोलियों ,तकनीकों,विकल्पों को रख देगा और हम सब जीवन भर बस सुरक्षित प्यार ,परिवार और खुशियों की ख़ातिर दर बदर अस्पतालों की सीढ़ियां चढ़ते रहेंगे और कोसेंगे कभी ख़ुद को कभी पीछे छूट चुके उस बहकते ,मचलते प्यार को ।

अनवांटेड को अनवांटेड ही रहने दें और थोड़ा सा सजग हों ख़ुद के प्रति ,प्यार के प्रति ,परिवार के प्रति और स्वास्थ्य के प्रति। फिर भी अगर कोई मुश्किल आ जाये तब केमिस्ट की दुकान नहीं डॉक्टर की सलाह लेकर अगला क़दम बढ़ाये। दोस्तों आज हम अगर खुलेआम प्यार करने को अपनी आज़ादी समझते हैं और अधिकार भी तो खुलेमन से गलतियों को भी स्वीकारें और चोरी से नहीं निसंकोच होकर डॉक्टरों की सलाह से ही निराकरण करें ।

आज़ादी और अधिकार की बात करने वाली युवा पीढ़ी जब खुलकर प्यार और सेक्स जैसी बातों के लिए आज़ादी की कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार दिखती है तो फिर इस लड़ाई में प्यार और सेक्स के साइडइफेक्ट और स्वास्थ्य के साथ होने वाले खिलवाड़ के प्रति भी सजगता को दिखाए ही नहीं जीवन में अपनाए तब होगी प्यार की जीत और तभी खुशियां होंगी वांटेड ,मुश्किलें अनवांटेड।

शालिनी सिंह एंकर- ऑल इंडिया रेडियो व स्वतंत्र लेखिका

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किताब रिव्यु : मौन मुस्कान की मार – Ashutosh Rana

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Maun Muskan Ki Mar Book

आशुतोष राणा (Ashutosh Rana) जी के बहुआयामी व्यक्तित्व से कौन परिचित नहीं। अभिनय के क्षेत्र में वह जितने अच्छे कलाकार हैं उतने ही उम्दा लेखक भी हैं। उनकी पुस्तक ‘मौन मुस्कान की मार’ (Maun Muskan Ki Mar)जीवन दर्शन का एक व्यापक आसमान समेटे है। इसमें सम्मिलित सत्ताइस व्यंग्य रचनाओं पर बहुत कुछ पहले ही कहा जा चुका है। इसमें कोई शक नहीं है कि विविध विषयों पर आधारित यह सब रचनाएँ एक से बढ़कर एक हैं ,बेजोड़ हैं, और बेहद सशक्त भी।

व्यंग से भरपूर है Ashutosh Rana की किताब “Maun Muskan Ki Mar”

मुझे इस किताब “Maun Muskan Ki Mar” में जिस बात ने सबसे ज़्यादा आकर्षित किया वह है व्यंग्य के ज़रिए दी जानेवाली सीख, वरना ज़्यादातर व्यंग्य रचनाओं में समस्या का बखान या बखिया उधेड़ना तो होता है पर उन समस्याओं का समाधान क्या होना चाहिए , ऐसा कुछ भी पढ़ने, समझने को नहीं मिलता । आशुतोष जी (Ashutosh Rana) की रचनाओं में सबसे खूबसूरत यही बात है । जीवन दर्शन पर लिखे उनके अनेक लेखों के जरिए हम पहले ही यह जानते हैं की विभिन्न विषयों पर उनकी कितनी गहरी पकड़ है ।

sushma gupta reading

Dr. Sushma Gupta reading book “Maun Muskan Ki Mar”.

“Maun Muskan Ki Mar” किताब शुरू होती है , कन्वे की कॉफी से। आशुतोष सर (Ashutosh Rana) का बात कहने का अंदाज़ ‘अपनी बात’ कहने के लिए भी निराला ही है। बचपन का प्रसंग कन्वे की कॉफी वाला जिसको उन्होंने इस पुस्तक का आधार बताया है , अपने आप में एक बहुत बड़ी शिक्षा देता है । व्यंग्य विधा एक बहुत ही कठिन विधा है जिसमें आशुतोष सर (Ashutosh Rana) को महारत हासिल है।

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अभिनेता के साथ साथ कवि भी है Ashutosh Rana

हँसी-हँसी में बात कह जाना और ऐसे कह जाना जो दिल-दिमाग पर गहरी छाप छोड़ दे, यह आशुतोष जी (Ashutosh Rana) की खासियत है। मैं यहाँ पर उनकी हर रचना में से अपनी पसंद की कुछ पंक्तियाँ हाईलाइट कर रही हूँ।

Actor Ashutosh Rana

किताब “मौन मुस्कान की मार” के लेखक फिल्म अभिनेता “आशुतोष राणा” (Ashutosh Rana) अपने लैपटॉप पर काम करते हुए.

उनकी (Ashutosh Rana) पहली रचना “लामचंद्र की लाल बत्ती” (Lamchandra Ki Lal Batti) , जिसका मुख्य किरदार जीवन भर लाल बत्ती वाली गाड़ी की लालसा में लगा रहता है और न मिल पाने पर अपना मानसिक संतुलन ही खोने के कगार पर पँहुचने लगता है । यह रचना जीवन में लगभग भूला ही दिए गए एक बड़े सच की तरफ हमारा ध्यान खींचती है ।

कई रचनायें लिखी है अभिनेता “Ashutosh Rana” ने

“सफलता पूर्वक जीवन जीने के लिए जितना महत्व संकल्प का होता है, शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए उतना ही महत्व विकल्प का भी होता है। विकल्प जहाँ जीवन में शांति की सृष्टि करते हैं वही संकल्प कभी-कभी अशांति का कारक होता है।”  उनकी दूसरी रचना ‘गप्पी और पप्पी’ (Gappi Or Pappi) ध्यान आकर्षित करती है , आज के समाज में फैली हुई उस दिखावे की देवी की ओर जो वर्तमान में सबसे ज़्यादा पूजनीय है । परंपरा , धर्म , मुल्य सब को कटघरे में खड़ा कर

नोट : आप इस किताब “Maun Muskan Ki Mar” को भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन स्टोर “अमेज़न” से खरीद सकते हैं या फिर आप ऑनलाइन ईबुक में भी पढ़ सकते है.

बुक खरीदने का लिंक : मौन मुस्कान की मार

ई बुक लिंक : मौन मुस्कान की मार

 

रिव्यु लेखक : डॉ सुषमा गुप्ता

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स्वच्छ भारत मिशन की धज्जियाँ उड़ाता कानपुर नगर निगम, गंदगी देख पीएम को भी आ जाएगी शर्म

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#स्वच्छ_भारत_अभियान
#देश के प्रधानमंत्री जी का सपना #स्वच्छ_भारत हो अपना
जब तक ये सोच नहीं होगी👇
#देश के हर नागरिक का हो सपना स्वच्छ भारत हो अपना

लगता है नगर निगम कानपुर (Kanpur Municipal Corporation) ने ठान लिया है हमें तो #प्रथम स्थान पर बने रहना है चाहे जो हो जाए ..😊

#मोदी जी भारत को स्वच्छ बनाने के लिए कितना प्रयास कर रहे हैं ये हम सभी देख रहे हैं उनके प्रयास सराहनीय भी है , पर क्या वास्तविकता में धरातल पर कोई कार्रवाई हो रही है , कोई सुधार हो रहा है?? आज कोचिंग से लौटते वक्त मात्र कुछ km के रास्ते में तीन प्रमुख स्थानों कि दशा देखी तब पता चला कि पिछले दिनों WHO कि जो रिपोर्ट पढ़ी थी वो तो बिल्कुल(💯 %) fit बैठ रही है अपने #कानपुर_महानगर पे

स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत करते प्रधानमंत्री मोदी 

ऐसे ही नहीं #कानपुर #WHO की रिपोर्ट में दुनिया में प्रदूषण में #प्रथम स्थान प्राप्त किया है बाकी आप फोटो में गन्दगी कि स्थिति देख ही सकते हैंऔर ये स्थिति तो तब है जब देश के #प्रधानमंत्री जी इस अभियान को एक युद्ध की भांति समझकर पूरे भरसक प्रयास से प्रशासन के साथ साथ अपनी राजनीतिक पार्टी (विश्व की सबसे ज्यादा कार्यकर्त्ता वाली पार्टी) के सभी पदाधिकारियों को इस अभियान में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने को कह रहे हैं , उसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं होना कोई आश्चर्य चकित होने की बात नहीं है( बस एक बार किसी स्वच्छता कार्यक्रम के कुछ समय पहले या कुछ समय बाद चले जाना जब #मीडिया जा चुकी हो)

ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सरकारी अधिकारियों , कर्मचारियों में क्षमता नहीं है , शहर को स्वच्छ करने की
क्योंकि जब भी कोई कार्यक्रम होता है ,कोई बड़ा नेता आता है तो ये एक दिन के अन्दर अपने क्षेत्र को ऐसे चमका देते हैं पूछो मत , आखिर नेता जी को खुश जो करना है , System पर आरोप लगाने के साथ-साथ हम सभी को भी जागरूक होने की जरूरत है , कहीं न कहीं हम लोग भी इस गन्दगी के जिम्मेदार है ,

क्योंकि ये कूड़ा कहीं बाहर से नहीं आ रहा है न ही सफाई कर्मचारी , अधिकारी आकर फेंक रहा है , ये कूड़ा आखिर फेंक भी तो हम ही लोग रहे हैं , क्योंकि जब तक हमें कोई प्रत्यक्ष व्यक्तिगत नुकसान न हो तो हम लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता , पर आपको शायद ये अनुभूति भी नहीं है कि ये हमारी आने वाले समय के लिए slow poisson का कार्य कर रहा है ।।

यह भी पढ़े : देशद्रोह के आरोपी ‘कन्हैया कुमार’ को वोट देने का पाप कर पायेगी बेगूसराय की जनता?

इसीलिए हम सभी को इस अभियान को किसी एक राजनैतिक पार्टी से न जोड़कर देश की इस मुहिम को सफल बनाने के लिए SYSTEM के साथ साथ खुद को भी जोड़ना होगा , अपने आसपास गन्दगी फैलाने वाले लोगों को जागरूक करना होगा , सफाई कर्मचारी द्वारा सफाई न किये जाने पर उसकी शिकायत समय निकाल कर करनी होगी , आपके द्वारा चुने गये पार्षद को अपने वार्ड कि समस्या मुखर होकर बतानी होगी (ये भूलकर कि वो हमारे मिलने वाले हैं उनसे शिकायत क्या करें)

बाकी देश तो चल ही रहा है !!!

✍️✍️
अभिनव दीक्षित

 

नोट : इस लेख में लेखक के स्वयम के विचार हैं. बंधुत्व डॉट इन के संपादक या टीम का लेखक के विचारों से सहमत होना अनिवार्य नहीं है. अत: किसी भी वाद विवाद के लिए लेखक स्वयम जिम्मेदार होगा.

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राजनीति मंच

देशद्रोह के आरोपी ‘कन्हैया कुमार’ को वोट देने का पाप कर पायेगी बेगूसराय की जनता?

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कन्हैया कुमार ने जेएनयु कैम्पस में लगाये थे भारत विरोधी नारे?

‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया’ ने जब से बिहार के ‘बेगूसराय लोकसभा सीट’ से देशद्रोह के आरोपी ‘कन्हैया कुमार’ (kanhaiya kumar) का नाम आगे किया तब से ही बिहार और देश में इस बात पर चर्चा जोर पकड़ने लगी हैं कि ज्ञान की धरती बिहार से क्या अब देश द्रोही निकलने लगेंगे या फिर बिहार की जनता ऐसे साँपों को कुचलने का काम करेगी.

अभिव्यक्ति के इस दौर में टुकड़े टुकड़े गैंग की हिम्मत तो देखिये, पहले उच्च शिक्षण संसथान ‘जेएनयु’ में देश विरोधी नारे लगाने का माला सामने आता है. नारे भी ऐसे लगे जिन्हें सुनकर हर भारतीय का पारा चढ़ जाये. मानों देश में देश विरोध की लहर चल उठी हो?

People of Begusarai will be able to commit sin to vote for kanhaiya-kumar accused of sedition? Photo Credit : google.com

उधर ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ की तरफ से इसे ‘अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता’ करार दिया गया. मैं आपको उन नारों से एक बार फिर रूबरू करा दू ताकि आपकी सोई हुई भारतीयता और देश प्रेम जाग सके.

JNU कैंपस में लगे थे ये नारे

हम क्या चाहते? आजादी’ ‘हम लेके रहेंगे, आजादी’
‘गो इंडिया, गो बैक’
‘संग बाजी वाली आजादी (पत्थर फेंकने की आजादी)’
‘भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह’
‘कश्मीर की आजादी तक जंग रहेगी’
‘भारत की बर्बादी तक आजादी’
‘भारत के मुल्क को एक झटका और दो’
‘भारत को एक रगड़ा और दो’
‘हम छिन के लेंगे आजादी, लड़के लेंगे आजादी’
‘तुम कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा’
‘अफजल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं’
‘अफजल तेरे खून से इंकलाब आएगा’
‘कितने मकबूल मारोगे, हर घर से मकबूल निकलेगा’
‘इंडियन आर्मी को दो रगड़ा’

हमारे देश को गाली देकर, आतंकियों की बरसी मनाकर, इन्डियन आर्मी की बर्बादी की चाह रख कर, भारत की बर्बादी अर्थात देश के लोगो की बर्बादी, बिहार के लोगों की बर्बादी, बेगूसराय के लोगों की बर्बादी तक जंग रखने वालों को क्या बेगूसराय की जनता वोट देगी? नहीं बिलकुल नहीं देगी, क्योकि बिहार के लोग ज्ञानी हैं देश द्रोही नहीं जो किसी देश द्रोही को वोट देकर उसके मनसूबो को कामयाब करने में उसका साथ देगी.

अगर यह ‘देशद्रोह का आरोपी’ ‘कन्हैया कुमार’ बेगूसराय से जीत गया तो फिर समझ लीजिये क्या होगा? वही होगा जो ऊपर नारे लगाये गये हैं फिर उसको इम्प्लीमेंट यानी फिर इन नारों पर काम किया जायेगा. फिर ‘भारत की बर्बादी तक जंग’ रखने वाले देश को बर्बाद करेंगे और साथियों देश तभी बर्बाद होता हैं जब उसके नागरिक बर्बाद हो जाये.

People of Begusarai will be able to commit sin to vote for kanhaiya-kumar accused of sedition? Photo Credit : google.com

इसका मतलब सीधा हैं कि बर्बादी आपकी और हमारी होना निश्चित हैं. मेरा काम हैं आपको जगाने का. मैं अपनी तरफ से प्रयास कर रहा हूँ बाकि आपको देखना हैं कि आपको जागना हैं या फिर अपनी और देश की बर्बादी का तमाशा देखना हैं. मेरे बेगूसराय के भाई और बहनों आज कल बेगूसराय में बॉलीवुड से भी कुछ भांड आकर तमाशा दिखा रहे हैं रंगीन मिजाज में आपके साथ छल किया जा सके.

क्या सुभाष चन्द्र बोस जी ने इसी दिन के लिए हमें आज़ादी दिलायी थी? क्या उन्होंने कभी सोचा होगा कि मैं जिन लोगों को आज़ाद कराने के लिए अपना बलिदान दे रहा वही एक दिन इस देश को बर्बाद होता देखते रहेंगे. बेगूसराय वासियों अभी भी वक्त है जागो क्योकि लोकतंत्र यह नहीं सिखाता कि आप किसी देशद्रोह के आरोपी को सांसद बनाओं, लोकतंत्र यह कतई नहीं कहता कि देश विरोधी ताकतों को मजबूत करों,

लोकतंत्र यह भी नहीं सिखाता कि आपकी ही बर्बादी तक जंग रखने वालों को आप अपना मशीहा बना लो, लोकतंत्र यह बिलकुल नहीं कहता कि आपकी सेना को मिटाने वालों को आप जन समर्थन दो, लोकतंत्र यह बिलकुल नहीं सिखाता कि आतंकवादियों की बरसी मनाने वालों को आप सत्ता सौप दो.

People of Begusarai will be able to commit sin to vote for kanhaiya-kumar accused of sedition? Photo Credit : google.com

आज तो बाबा भीम राव आंबेडकर जी की आत्मा भी किसी कोने में रो रही होगी कि क्या देश था मेरा और आज क्या बन गया हैं आज लोग दुश्मन को पहचान नहीं रहे जबकि यही दुश्मन उन्हें बर्बाद करने की योजना बना रहा हैं. मैं एक बात दावे से कह सकता हूँ कि अगर आज नेहरु जी जिन्दा होते तो देश की बर्बादी तक जंग रखने वालों से एक बार फिर खुद भीड़ जाते क्योकि उनके अन्दर देश प्रेम था तभी उन्होंने अपना पूरा जीवन इस देश के लिए लगा दिया.

मैं बेगूसराय वासियों से यह कठोर अपील करता हूँ कि करता हूँ कि अपना वोट किसी भी देश द्रोह के आरोपी को ना दे और साथ ही अपने पड़ोसियों, दोस्तों और रिश्तेदारों को भी समझाए कि किसी भी ऐसे व्यक्ति को वोट ना करे जो हमारे देश की बर्बादी तक जंग रखने की बात करता हो, हमारी सेना को मिटाने की बात करता हो, आतंकवादियों को हर घर से निकालने की बात करता हो.

मुझे आशा हैं कि बेगूसराय की जनता कन्हैया कुमार को वोट देकर पाप की बह्गी नहीं बनेगी.

जय हिन्द ! वंदेमातरम्  

विनोद कुमार

राष्ट्रवादी एव राष्ट्रीय चिन्तक

नोट : यह लेख पूरी तरह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (freedom of expression) पर आधारित हैं. भारत के संविधान के अनुच्छेद १९(१) के तहत सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गयी है. अत: किसी भी प्रकार के वाद विवाद के लिए लेखक जिम्मेवार नहीं हैं क्योकि यह देश पूरी तरह से राष्ट्रवादियों का हैं इस देश से नफरत करने वालों की यहाँ कोई जगह नहीं.

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