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सामाजिक मच

MUMBAI : राजलक्ष्मी सिंह देवी की पांचवी पुण्यतिथि मानायी गई

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नेशनल टीवी इंडिया : (मुंबई) आज दिनांक 16 मई 2019 राजलक्ष्मी फिल्म प्रोडक्शन हाउस के फाउंडर और मालकिन स्वर्गीय राजलक्ष्मी सिंह देवी जी की पांंचवी पुण्यतिथि मनाई गई। इस मौके पर राजलक्ष्मी फिल्म प्रोडक्शन हाउस के मुंबई स्थित कार्पोरेट ऑफिस 5/21 कैैैैलाश नगर, शंकर लेन कांदिवली वेस्ट – 67 , व पटना के कंंकङबाग अशोक नगर रोड नंबर -7 स्थिति रजिस्ट्रड ऑफिस में सर्वधर्म प्रार्थना सभा एवं हवन का आयोजन किया गया ।

तैल्य चित्र पर माल्यार्पण किया 

इस मौके पर स्वर्गीय राजलक्ष्मी सिंह देवी जी पति व शिक्षाविद प्रोफ़ेसर डाॅ. कपिल देव प्रसाद सिंह ने उनके तैल्य चित्र पर माल्यार्पण एवं हवन कर श्रध्दांजलि अर्पित किया। वहीं स्लम वस्ती में रहने वाले गरीब स्कूली बच्चों के बीच पाठ्य सामग्री वितरित किया गया।
श्रद्धांजलि सभा उद्घाटन मुख्य विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद प्रोफेसर डाॅ. राम भरत सिंह (मगघ युनिवर्सिटी बोधगया), मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ उपेंद्र शर्मा, (किसान कालेज बिहार शरिफ) श्री रविन्द्र सिंह (डायरेक्टर सिंह क्लासेज,मोहन गार्डेन दिल्ली) प्रोफेसर डाॅ. महेश कुमार (एस.के.एस कालेज लोहन्डा सिकन्दरा) , बैद्यनाथ रमण  (प्रदेश अध्यक्ष, प्रचार विभाग, भाजपा बिहार), बालीवुड के जाने माने निर्देशक आनंद राउत एवं राजलक्ष्मी फिल्म प्रोडक्शन हाउस एण्ड राजलक्ष्मी फिल्म पीएचआरजेफ ग्रुप के सीइओ/चेयरमैन अविनाश ओंकर आनंद ने संयुक्त रूप से किया।
Rajlaxmi Singh Devi
वहीं डाॅ. प्रोफेसर राम भरत सिंह ने श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए मंच का संचालन किया। वहीं सभा को संबोधित करते हुए सभी गण्यमान्य वक्ताओं ने उनकी सादगी भरे जीवन पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर श्री रविन्द्र सिंह ने उनके सादगी भरे जीवनशैली पर चर्चा करते हुए कहा कि हम सभी को उनके सदगी और उदारता भरे जीवन से सिख लेते हुए उस पर अपने जीवन में अमल करना चाहिए। डाॅ प्रोफेसर महेश कुमार ने इस श्रद्धांजलि सभा के अंत में आये हुए मंच पर सभी व्याख्याताओं का धन्यवाद ज्ञापन किया।

अविनाश ओंकर आनंद ने उनके याद में कविता पढ़े।

अविनाश ओंकर आनंद ने कहा की एक माँ का कर्ज कोई भी पुत्र कभी नही उतार सकता है। आज मां ने जो मुझे दायित्व  सौपा कर चली गई , मैं उसका निर्वाह कर उनके सपनो को साकार करू यही मेरी दादी माँ के लिए मेरे सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मै मां के लिए कुछ पंक्ति बोल रहा हूं
बच्चों को खिलाकर जब सुला देती है मां
तब जाकर थोड़ा-सा सुकून पाती है मां
प्यार कहते हैं किसे और ममता क्या चीज़ है
कोई उन बच्चों से पूछे जिनकी गुज़र जाती है मां
चाहे हम खुशियों में मां को भूल जाएं
जब मुसीबत सिर पर आती है तो याद आती है मां

गण्यमान्य अतिथि बने इस क्षण के गवाह 

इस मौके पर राजलक्ष्मी सिंह देवी जी के बङे पौत्र एवं राजलक्ष्मी फिल्म प्रोडक्शन हाउस एण्ड राजलक्ष्मीफिल्म पीएचआरजेफ ग्रुप  के सीईओ/ चेयरमैन अविनाश ओंकर आनंद, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर राकेश सिंह, टेक्निकल डायरेक्टर प्रभा सिंह, मेकअप एण्ड हेयर डायरेक्टर अनामिका सिंह, मिडिया पार्टनर नेशनल टीवी इंडिया के बिहार-झारखंड स्टेट एडिटर जर्नलिस्ट अमित कुमार, उनके बङे पुत्र नवीन कुमार रंजन, सुधीर कुमार, मुरली मनोहर, माडल एक्टर हरे राम शर्मा (मिलन शर्मा), श्यामदेव पाठक एवं समस्त राजलक्ष्मी परिवार के लोग सहित गण्यमान्य लोग मौजूद थे, जो इस अलौकिक क्षण के गवाह बने।

 

लेख

सावधान ! लव सेक्स और फिर गर्भ निरोधक दवाइयों का खेल – शालिनी सिंह

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RJ Shalini

मॉर्डन होती ज़िन्दगी में एक तरफ़ हेल्थ कॉन्शस होते हम और दूसरी तरफ खुद को जागरूक मानते हुए अपनी समझ से तो सही किंतु वास्तविक दृष्टिकोण में एकदम ग़लत और बचकाने फैसले से स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हम कर रहे हैं और इसके ज़िम्मेदार कोई एक लोग नहीं पूरी एक व्यवस्था ही है।

आज हर कोई पेज थ्री का एक करेक्टर बनना चाहता है ,दिखना चाहता है किंतु भूल जाता है कि 3 घण्टे के शो में दिखा हर पहलू कट, कैमरा ,एक्शन,और फिर एडिटिंग से संवर कर निकला हुआ वो कैप्सूल होता है जो सिर्फ मनोरंजन का साधन होता है और कभी कभी तमाम सवाल, और जवाब छोड़ जाता है मानसपटल पर जिसके उत्तर की ख़ातिर उस तीन घण्टे के कैप्सूल को हम जीवंत करने लगते हैं ज़िन्दगी में।

जी हां दोस्तों हर युवा ने फिल्मों से ही तो जाना सीखा कि प्यार कैसे होता है , और फिल्मों से ही जाना लव, सेक्स और धोखा क्या है ? लेकिन फिल्मों से ये नहीं जान सका कि सुरक्षित सम्बन्ध के लिए रंग में भंग भी न पड़े और रिस्क भी न हो तो प्यार में कब और कौन सा कैप्सूल प्रेमिका को खिलाना है …… अफसोस भी है और आश्चर्य भी कि प्यार में बहकते भटकते क़दम जब लड़खड़ा जाते हैं तब उस गलती को सुधारने का खूबसूरत उपहार होती है अनवांटेड 72 …. जी हां अनवांटेड 72 की एक गोली असुरक्षित यौन सम्बन्धों के होने वाले परिणाम से बचाने में साथ निभाती है 72 घण्टों के भीतर उपयोग में ली जाए तो ।

unwanted 72

सोच के देखिए कि अगर ये गोली इतनी ताकतवर है कि वांटेड को अनवांटेड कर सकती है तो कितनी घातक होगी। लेकिन प्यार में अंधे युवाओं ने जब tv पर इसका एड देखा होगा तो यकीनन उनके प्यार के पंखों को आसमान मिल गया होगा।

लेकिन अफ़सोस कि न तो किसी एड में ये पता चला न ही किसी स्वास्थ्य केंद्र के सुरक्षित सम्बन्ध के उपायों पर जागरूकता अभियान में कि अनवांटेड 72 की गोली जीवन भर की खुशियों को अनवांटेड करने में प्रभावशाली है। एड कम्पनी या फिर मेडिसिन लांच करने वाली कम्पनी या किसी भी स्वास्थ्य केंद्र की गलती हो तब दोष भी दिया जाए ।

असल में प्यार में डूबे ,भटकते, बहकते युवाओं की गलती है कि वो प्रेमांधता में ख़ुद की सुरक्षित करने के लिए जिस अनवांटेड 72 का अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं वो प्रेमिका हो या पत्नी किसी के लिए भी घातक है। ये गोली असुरक्षित यौन सम्बन्ध के लिए है ही नहीं उसके लिए तो ,सहेली ,माला डी, जैसी गोलियां है जो नियमित खानी पड़ती हैं या फिर , कंडोम ,कॉपर टी का उपयोग आम चलन में है जो हर अस्पताल में सरकारी सुविधाओं , अभियानों में लोगों के बीच जागरूकता के उद्देश्य से और सुरक्षित सम्बन्ध के साथ परिवार नियोजन हेतु अपनाने के लिए प्रसारित किए गए।

अनवांटेड 72 का कभी अस्पतालों में प्रचार नहीं किया गया क्योंकि ये गोली आपातकालीन गोली है उन अवस्थाओं के लिए जिसमें अधीरता में या जबरदस्ती या गलती से स्थापित सम्बन्ध के बाद गर्भ ठहरने के डर को समाप्त करने और स्त्री के जीवन की बड़ी मुश्किलों को सहज करने में उपयोग की जाती है ।

इसका अधिक उपयोग स्त्री को बांझ बनाने में सहयोगी है इस बात की जानकारी से कोसों दूर धड़ल्ले से प्रयोग करती लड़कियों ने इसे जादुई गोली समझकर अपना लिया और कैमिस्ट की दुकान में खुले आम उपलब्धता ने भी इस भ्रम को पुरजोर समर्थन दिया कि इसका उपयोग प्यार की राह की मुश्किलों को आसान करने के लिए ही है। आज गर्भधारण के लिए डॉक्टरों के क्लीनिक पर लाखों खर्च करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है वो भी उन लोगों की जो पढ़े लिखे ,स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और संभ्रांत हैं। एक बड़ी वजह आपके सामने लाने का प्रयास कर रही हूँ ।

इस बाबत जब मेरी डॉक्टर मित्रों से चर्चा होती है तो पता चलता है कि इन दवाओं की वजह होने वाले दुष्परिणाम को भोगती महिलाएं अक्सर आती हैं …..

जिनकी शिकायत होती है कि गोली खाई थी उसके बाद पीरियड तो आ गए लेकिन रक्तस्राव बन्द ही नहीं हो रहा ,या फिर अनियमित हो गया , वजन बढ़ने लगा आदि। हार्मोन्स पर असर डालती इन गोलियों के दुष्प्रभावों पर भी नज़र डालने की ज़रूरत है और केमिस्ट की दुकानों पर सहज उपलब्धता पर भी रोक लगाए जाने की ज़रूरत है ।

बाज़ार तो सोची समझी रणनीति के तहत फल फूल रहा है किंतु प्यार की असहजता को सहजता के रूप में परोसकर यही बाज़ार प्यार को कुछ दिन ,महीनों ,सालों का सुकून भले दे दे लेकिन उसके बाद जीवन की खुशियों पर ग्रहण बनकर छायेगा और फिर एक बार यही बाज़ार खुशियां देने के प्रलोभन लेकर कुछ और गोलियों ,तकनीकों,विकल्पों को रख देगा और हम सब जीवन भर बस सुरक्षित प्यार ,परिवार और खुशियों की ख़ातिर दर बदर अस्पतालों की सीढ़ियां चढ़ते रहेंगे और कोसेंगे कभी ख़ुद को कभी पीछे छूट चुके उस बहकते ,मचलते प्यार को ।

अनवांटेड को अनवांटेड ही रहने दें और थोड़ा सा सजग हों ख़ुद के प्रति ,प्यार के प्रति ,परिवार के प्रति और स्वास्थ्य के प्रति। फिर भी अगर कोई मुश्किल आ जाये तब केमिस्ट की दुकान नहीं डॉक्टर की सलाह लेकर अगला क़दम बढ़ाये। दोस्तों आज हम अगर खुलेआम प्यार करने को अपनी आज़ादी समझते हैं और अधिकार भी तो खुलेमन से गलतियों को भी स्वीकारें और चोरी से नहीं निसंकोच होकर डॉक्टरों की सलाह से ही निराकरण करें ।

आज़ादी और अधिकार की बात करने वाली युवा पीढ़ी जब खुलकर प्यार और सेक्स जैसी बातों के लिए आज़ादी की कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार दिखती है तो फिर इस लड़ाई में प्यार और सेक्स के साइडइफेक्ट और स्वास्थ्य के साथ होने वाले खिलवाड़ के प्रति भी सजगता को दिखाए ही नहीं जीवन में अपनाए तब होगी प्यार की जीत और तभी खुशियां होंगी वांटेड ,मुश्किलें अनवांटेड।

शालिनी सिंह एंकर- ऑल इंडिया रेडियो व स्वतंत्र लेखिका

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राजनीति मंच

मुस्लिम वोट की खेती काटने के बाद भी राजनैतिक पार्टियों ने मुस्लिम समाज को आगे क्यों नहीं बढ़ने दिया? – नकी हैदर

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सत्रहवीं लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा परेशान और सबसे ज्यादा चुनावी गप्पें हर जगह “M” आबादी वाले क्षेत्र के लोगों ही कर रहे हैं,ये एक कटु सत्य है जिसको हर्ष के साथ स्वीकार कीजिए और पहली लोकसभा चुनाव से लेकर सत्रहवीं लोकसभा तक के सफ़र पर निगाहें डालिए तो मियां भाई के नाम से पहचाने रखने वाले इस “M” श्रेणी के वोट बैंक की जिन्दगी में कोई ख़ास बदलाव तो नहीं हुआ है बल्कि यू कहें तो 1947 के मुकाबले 2019 तक आते-आते इनकी जिन्दगी का स्तर और नीचे गिरा है और सियासी दलों ने भी गिराया है

आप आज़ादी के बाद से मोची थे वो आज भी है आप दर्जी थे वो आज भी है आप ख़ाना पकाते वो आज भी है आप लखनऊ में चिकन पर अपनी अंगुली चलाते थे वो आज भी कर रहे हैं

muslim voter

सांसद के चुनाव में दरअसल आपको ज्यादा मज़ा लेना ही नही चाहिए क्योकि इससे आपकी ज़िन्दगी पर कोई असर पङने वाला नहीं है,देश में चुनाव जातियों के आधार पर होते हैं इसमें कही से कोई भी शक नहीं है सभी राजनैतिक दल अपने प्रत्याशी जातियां समीकरणों को देखकर उतारते हैं और आप इसमें कहीं से भी फीट नहीं बैठते हैं और हाँ प्रधान मंत्री की कुर्सी पर बैठने का सुख आपको कभी मिलना ही नही है और आप अपनी रोज़ी रोटी छोङकर कौन जीतेगा कौन हारेगा में लगे हुए हैं

क्या समाजवादी पार्टी ने तेज बहादुर यादव का इस्तेमाल किया?

मेरी राय मान लीजिए चुनाव में मज़ा लेना छोङ अपनी दाल रोटी की चिंता कीजिए अपने बच्चो की तालीम की चिंता कीजिए अपने इलाकों को इल्म की रोशनी से मजबूत कीजिए जब ये सब हो जाए तब दिल खोलकर चुनावी बहस कीजिएगा
चुनाव है यहाँ रोड शो भी होंगे और पैराशूट प्रत्याशी को भी उतारा जाएगा फिल्म जगत के खुबसूरत चेहरे भी हाथ हिलाने आएंगे और आपके वोट निकलवाने के नाम की कीमत दलों से लेकर चले जाएंगे लेकिन आपको अगले दिन कुर्ता ही सीना है और हमको जूते में कील ही ठोकनी है तो फिर आप इस चुनावी मौसम की बहस में काहे परेशान है

Muslim Voter

सत्रहवीं लोकसभा चुनाव के दो चरण पाक महीने रमजान में है तो बस आप सुबह-सुबह सहरी के वक्त सहरी कीजिएगा फिर थोङा ख़ुदा की किताब की तिलावत समझ कर कीजिएगा और नमाज़ पढने के बाद घङी मे लगभग थोङा देर बाद सात बज जाएगा तो बस अपने बूथ पर वोट डालने चल दीजिएगा और वोट दीजिएगा ज़रुर बस इल्म के बाद लोकतंत्र में वोट की ही ताक़त सबसे बङी ताकत होती है

Azam Khan को सभी के अंडरवियर के रंगों की पहचान है? – प्रियंका

सरकार जिसको बनानी है बनाने दीजिए आप बस वोट दीजिए और वापस अपने आने वाली पीढ़ी के लिए इल्म का दरिया इकट्ठा कीजिए फिर दीजिएगा लोकसभा में लोकतंत्र की बहस को असली चुनौती और अपनी ताक़त की असली कीमत तब लीजिएगा इन चंद सियासी दलों के रहनुमा बनने वालो कुछ एक नेताओं के गिरेबानो से पर तब तक अपनी अक्ल के तालों को खोल लीजिए और इल्म हर कीमत पर हासिल कीजिए

नकी हैदर की ✍✍✍

Naki Haidar

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राजनीति मंच

Fake News की फसल आज मीडिया भी काट रही है?

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Fake News

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर फ़र्ज़ी खबरों (Fake News) का एक दौर सा चल पड़ा है औऱ कम पढ़े लिखे की बात छोड़िये, कई बार पढ़े लिखे विद्वान भी झूठे कंटेंट को सच मान शेयर कर बैठते हैं..

अभी हाल के ही चार – छः दिन पहले सोशल मीडिया (Social Media) पर एक पोस्ट वायरल (Viral) थी कि नरेंद्र मोदी जी (Narendra Modi) ने भाषण के दौरान BC वाली गाली दी..

चूंकि मोदी जी (Modi Ji) प्रधानमंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे हैं तो उनके द्वारा इस तरह की अमर्यादित भाषा पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल था..और यकीन हुआ भी नहीं..और हमेशा की तरह बिना सच जाने कुछ भी लिखने से खुद को रोक रखा था..

फिर अचानक उसके बाद कुछ लोगों ने उनकी एक रैली की छोटी सी क्लिप (Video Clip) डालकर ये कहना और लिखना शुरू किया की..”

लो अब ये पठान का बच्चा (Pathan ka Bachcha) देखो ” और न जाने कितनी तरह की पोस्टें दिखीं जबकि असल सच कुछ औऱ था..

कैसे सेट की जाती है Fake News?

सबसे पहले बात करते हैं मोदी जी (Narendra Modi) द्वारा दी गयी BC की गाली पर तो इससे सम्बंधित सबसे पहली पोस्ट 21 अप्रैल को एक कांग्रेसी समर्थक (Congress Supporter) गौरव पांधी (Gaurav Panthi) ने किया था

जिसमे उसने ट्वीट करते हुए लिखा था कि

“प्रधानमंत्री यह किस तरह की भाषा है? कुछ औऱ नहीं तो अपनी कुर्सी का सम्मान कीजिये.”

बस फिर क्या था हमेशा की तरह मोदी विरोधियों (Anti Modi) ने बिना जांच पड़ताल भेड़चाल की तरह चलते हुए सोशल मीडिया (Social Media) पर अपने अपने तरीके (Fake News) से प्रधानमंत्री का विरोध शुरू कर दिया

जबकि असल में प्रधानमंत्री ने गुजराती भाषा में भाषण के दौरान ” थवान चे तो ” बोला था जिसे एडिट कर के BC में बदल दिया गया..

Fake News

फिलहाल ये वीडियो क्विंट (quint)के लाइव स्ट्रीम पर कैप्चर कर चलाया गया था, जिसकी जानकारी होते ही क्विंट द्वारा उन सभी साइट्स के खिलाफ इसकी शिकायत भी की जा चुकी है जिन्होंने इस फेक वीडियो (fake Video) को चलाने की अनुमति दी..

Fake News फ़ैलाने में सहायक होता हैं Facebook और Whatsapp?

अब बात करते हैं दूसरे वीडियो की जिसमे मोदी जी कह रहे हैं कि ” मैं पठान का बच्चा हूं ” दरअसल ये वीडियो 23 फरवरी 2019 में राजस्थान के टोंक में आयोजित एक रैली का है..

“Most Importantly”

जहां मोदी जी ने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा था कि ” मैंने प्रोटोकॉल के तहत पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री को फोन कर बधाई दी औऱ

मैंने उनसे कहा था कि बहुत लड़ लिया हिंदुस्तान पाकिस्तान ने, पाकिस्तान ने कुछ नहीं पाया, हर लड़ाई हमारे वीर जीत चुके हैं औऱ ये सिलसिला आगे भी जारी रहेगा,

मैंने उनसे कहा था कि अब आप राजनीति में आए हो, खेल की दुनिया से आए हो, आओ भारत और पाकिस्तान मिल कर गरीबी के खिलाफ लड़ें, अशिक्षा के खिलाफ लड़ें, यह बात मैंने उनको उस दिन कही थी और उन्होंने मुझे एक बात और बताई थी कि मोदी जी- मैं पठान का बच्चा हूं, मैं सच्चा बोलता हूं, सच्चा करता हूं..

और फिर वही हुआ यानी कि हमेशा की तरह फ़र्ज़ी न्यूज़ (Fake News) पोस्ट करने वालों ने इस बयान के वीडियो के कुछ हिस्से को काटकर अपने काम का यानी जिससे उन्हें राजनैतिक लाभ मिल सके मात्र उस हिस्से को सोशल मीडिया (Social Media) पर लोगों के सामने मन मुताबिक कैप्शन के साथ परोस दिया..

Fake News फ़ैलाने में मीडिया के मठाधीशों का हाथ?

वैसे देखा जाए तो ये सारा का सारा मामला ठीक वैसा ही है जैसा नवम्बर 2017 में गुजरात की एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी के आलू से सोना बनाने वाले भाषण को काट छांट कर सोशल मीडिया (Social Media) पर (Fake News) वायरल (Viral) कर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का मज़ाक बनाया गया था

जबकि उस रैली के दौरान राहुल ने कहा था –

“आलू के किसानों को कहा कि ऐसी मशीन लगाऊंगा कि इस साइड से आलू घुसेगा उस साइड से सोना निकलेगा, इस साइड से आलू डालो,

उस साइड से सोना निकालो, इतना पैसा बनेगा कि आपको पता ही नहीं होगा कि क्या करना है पैसे का..? ये मेरे शब्द नहीं हैं, नरेंद्र मोदी जी के शब्द हैं “..

यानी यहां भी सिर्फ और सिर्फ राजनैतिक लाभ लेने के लिए भाषण के कुछ हिस्सों को काट कर (Fake News) सोशल मीडिया पर परोस दिया गया था औऱ लोगों ने भी बिना जांचे परखे उसे फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी..

Fake News से बचने की करे कोशिश

इससे साबित होता है सोशल मीडिया अब झूठे और फ़र्ज़ी टाइप के नेताओं औऱ उनके गुर्गों के चंगुल में आ चुका है और ये लोग अपने फायदे के लिए झूठ को सच और सच को झूठ के परसेप्शन में पेश कर रहे हैं..

और हम भी बिना सच की तह तक गए उनके फैलाये झूठ (Fake News) को वायरल कर देते हैं..भले ही हम वो ” मोदी से नफरत ” या ” राहुल से नफरत ” की वजह से ही क्यों न करते हों..

अंत में बिना जांच-पड़ताल के आधी अधूरी भ्रामक खबरों (Fake News) को और आधे आधे अधूरे बयानों को वायरल करते लोगों के बारे में शायद सिर्फ यही कहा जा सकता है कि ” यह लोग पांव नहीं जेहन से अपाहिज हैं.. उधर चलेंगे जिधर इनका रहनुमा चलाता है..!

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लेखक -अतुल तिवारी (आक्रोश)

स्वतंत्र पत्रकार

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